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पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के अंडकोष (टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸) में दरà¥à¤¦ के हो सकते हैं ये 10 कारण, यूरोलॉजिसà¥à¤Ÿ से जानें कैसे करें इसका इलाज
अंडकोष में दरà¥à¤¦ होने के कई कारण होते हैं। यूरोलॉजिसà¥à¤Ÿ से जानिठआखिर कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होते हैं अंडकोष में दरà¥à¤¦, इससे कैसे पाà¤à¤‚ निजात। कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ बरतें सावधानी।
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के अंडकोष (टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸) में दरà¥à¤¦ के कारण काफी परेशानी रहती है। इससे डेली रूटीन के काम करने में परेशानी होती है। सेकà¥à¤¸ करने में दिकà¥à¤•त आती है। परेशानी इतनी अधिक बढ़ जाती है कि लोग डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का शिकार हो जाते हैं। इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल के जरिठमें जमशेदपà¥à¤° के साकची में डॉकà¥à¤Ÿà¤° अरà¥à¤£ कà¥à¤®à¤¾à¤° (यूरोलॉजिसà¥à¤Ÿ) से बात कर जानेंगे कि अंडकोष में दरà¥à¤¦ के कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ कारण होते हैं। इसे कैसे ठीक किया जा सकता है। वहीं हम लोगों को किन-किन सावधानियों को बरतना चाहिà¤à¥¤
कà¥à¤¯à¤¾ होता है टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸
यूरोलॉजिसà¥à¤Ÿ बताते हैं कि अंडकोश की थैली (Scrotum) बाहर की तरफ à¤à¥‚ली होती है। इसमें टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ होते हैं। यह à¤à¤• नली के से कनेकà¥à¤Ÿ होती है। इसमें सà¥à¤ªà¤°à¥à¤® कलेकà¥à¤Ÿ होता है। इसके बाद सीमेन के जरिठबाहर निकलती है। यह सिरà¥à¤« शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ व सीमन का पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤¶à¤¨ नहीं करती है। बलà¥à¤•ी इससे हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ à¤à¥€ बनते हैं। जिसे टेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¨ कहते हैं। इससे पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में मरà¥à¤¦à¥‹à¤‚ जैसे गà¥à¤£ यानि दाढ़ी, à¤à¤¾à¤°à¥€ आवाज, मरà¥à¤¦à¤¾à¤¨à¤¾ शरीर आदि चीजें विकसित होती हैं।
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के अंडकोष में इन कारणों से होता है दरà¥à¤¦
1. टà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾ या किसी पà¥à¤°à¤•ार का à¤à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट होने के कारण
यूरोलॉजिसà¥à¤Ÿ बताते हैं कि टेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ के टà¥à¤¯à¥‚मर को टà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾ कहते हैं। इसमें पैन नहीं होता है। लेकिन टेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। इस बीमारी का पता लगाने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड कर बीमारी के बारे में पता लगाते हैं। इसके अलावा हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤¿à¤• लकà¥à¤·à¤£ से à¤à¥€ इसका पता चलता है। इसका इलाज करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° ऑपरेशन करते हैं।
2. चोट लगने की वजह से अंडकोष में दरà¥à¤¦
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ बताते हैं कि टेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ शरीर का काफी संवेदनशील à¤à¤¾à¤— होता है। अगर इसमें जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चोट लग जाठतो आदमी मौके पर ही मर सकता है। इसपर हलà¥à¤•ा à¤à¥€ दबाव पड़ेगा तो इसमें दरà¥à¤¦ होता है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ या सà¥à¤ªà¥‹à¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸à¤®à¥ˆà¤¨ को चोट लगने का खतरा होता है। इसलिठवो हमेशा गारà¥à¤¡ लगाकर खेलते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ चोट का à¤à¥€ असर रहता है, जिससे यह रह-रहकर दरà¥à¤¦ करता है।
3. टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल कैंसर à¤à¥€ है बड़ी वजह
यूरोलॉजिसà¥à¤Ÿ बताते हैं कि अगर आपके अंडकोष में कोई गांठया सूजन और दरà¥à¤¦ हो रहा है तो तà¥à¤°à¤‚त इसकी जांच कराà¤à¤‚। इससे हमेशा सतरà¥à¤• रहने की हमें जरूरत है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ यह दरà¥à¤¦ टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल कैंसर का à¤à¥€ कारण बनती है। यह टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ से पूरे शरीर में फैल जाता है।
4. à¤à¤ªà¥€à¤¡à¥€à¤¡à¥€à¤®à¤¿à¤¸ में सूजन होने से दरà¥à¤¦
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ बताते हैं कि à¤à¤• नली जो अंडकोष की पीछे होती है उसे हम अधिवृषण (Epididymis) कहते हैं। उसमें चोट लगने, संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने, सेकà¥à¤¸ से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने वाले संकà¥à¤°à¤®à¤£ से इसमें जलन होती है। इसके कारण इसमें सूजन की समसà¥à¤¯à¤¾ आ जाती है। इस वजह से अंडकोष में दरà¥à¤¦ होता है। शरीर में यदि आपको à¤à¥€ इस पà¥à¤°à¤•ार के लकà¥à¤·à¤£ दिखे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लेना चाहिà¤à¥¤
5. टॉरà¥à¤šà¤° टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¥€ है दरà¥à¤¦ की बड़ी वजह
यूरोलॉजिसà¥à¤Ÿ बताते हैं कि यह समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° यà¥à¤µà¤¾à¤“ं में होता है। इससे टेसà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿ अपने जगह से घूम जाती है। à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का रोटेशन करती है। इसके कारण इसकी बà¥à¤²à¤¡ सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ कम हो जाती है। इससे अंडकोष में असहनीय दरà¥à¤¦ होता है। अगर आपमें à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ है तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसकी सरà¥à¤œà¤°à¥€ तà¥à¤°à¤‚त कराना बहà¥à¤¤ ही जरूरी होता है। अगर समय पर इसका ऑपरेशन करा लें तो टेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ को बचा सकते हैं। अगर सरà¥à¤œà¤°à¥€ में लेट करेंगे तो टेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ काली पड़ कर खराब हो जाà¤à¤—ी।
6. अंडकोष की नलियां à¤à¤ªà¥€à¤¡à¥€à¤¡à¥€à¤®à¤¿à¤¸ (Epididymis) में समसà¥à¤¯à¤¾
अंडकोष में जो शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ को कलेकà¥à¤Ÿ करते हैं उसे à¤à¤ªà¥€à¤¡à¥€à¤¡à¥€à¤®à¤¿à¤¸ कहते हैं। अंडकोष में दरà¥à¤¦ का कारण इसमें इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो जाना होता है। यह इंफेकà¥à¤¶à¤¨ आपके यूरिन के कारण हो सकता है। इंफेकà¥à¤¶à¤¨ पेनिस के जरिठà¤à¥€ होता है। इसके लिठलोगों को डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लेकर दवा का सेवन करना चाहिà¤à¥¤ बिना डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह के दवा का सेवन करेंगे तो इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने का खतरा रहता है। इस कारण टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•लà¥à¤¸ की नसों में दरà¥à¤¦ और जलन होता है। कई बार इसमें चोट लग सकता है। 18 से 36 साल तक के लोगों को इस पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° होती है।
7. वैरिकोसील à¤à¥€ है बड़ा कारण, इससे à¤à¥€ टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में होता है दरà¥à¤¦
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ बताते हैं कि टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में दरà¥à¤¦ होने का बड़ा कारण वैरिकोसील à¤à¥€ है। टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में बà¥à¤²à¤¡ सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ ऑरà¥à¤•ाइटिस (Orchitis) के जरिठहोती है। यह वीनà¥à¤¸ (नसों) के जरिठफिर बà¥à¤²à¤¡ में चला जाता है। वीनà¥à¤¸ में वॉश होते हैं, वो अगर खराब हो जाते हैं तो बà¥à¤²à¤¡ सामानà¥à¤¯ रूप से से ऊपर नहीं जा पाता है और वो जमा हो जाता है। इससे पेन शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है, इस वजह से अंडकोष छोटा à¤à¥€ होता है। जब चलते फिरते हैं तो अंडकोष में दरà¥à¤¦ होता है। टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ की नसें बढ़ जाती हैं। उसमें सूजन आ जाती है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ आराम में रखने के लिठहम सपोरà¥à¤Ÿà¤° का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते हैं। इससे अंडकोष बढ़ता नहीं है। अगर à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ आठतो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिले, उनकी सलाह के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही दवा का सेवन करें।
8. हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बीमारी की वजह से टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में दरà¥à¤¦
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ बताते हैं कि कà¥à¤› केस में पेट की आंत कमजोर हो जाती है। इससे छोटी आंत के कà¥à¤› à¤à¤¾à¤— नीचे की तरफ आ जाते हैं। इसके कारण अंडकोष में पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° पड़ता है। इससे टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में दरà¥à¤¦ होता है। आंत का वजन हमेशा अंडकोष पर रहने के कारण हमेशा दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ रहती है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वजन वाला सामान जब हम उठाते हैं तो टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में दरà¥à¤¦ होता है। यदि शरीर में आपको इस पà¥à¤°à¤•ार के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई दे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लेकर इलाज करवाना चाहिà¤à¥¤
9. हाइडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤² की वजह से टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में दरà¥à¤¦
टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ के बाहर à¤à¤• लेयर होता है। इसमें पानी à¤à¤° जाता है। इसके कारण टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¥‚ल जाता है। पानी à¤à¤°à¤¨à¥‡ के कारण टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ का आकार बढ़ जाता है। इसे हम हाइडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤² कहते हैं। अंडकोष में इससे दरà¥à¤¦ होता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी à¤à¤°à¤¨à¥‡ से अंडकोष फट à¤à¥€ जाता है, जिससे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की मौत à¤à¥€ हो सकती है। इसलिठटेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ के बढ़ने के बाद तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलना चाहिà¤à¥¤ बीमारी को नजरअंदाज करना आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठखतरनाक साबित हो सकता है।
10. ऑरà¥à¤•ाइटिस (Orchitis) में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने से अंडकोष में दरà¥à¤¦
यूरोलॉजिसà¥à¤Ÿ बताते हैं कि ऑरà¥à¤•ाइटिस (Orchitis) में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने की वजह से à¤à¥€ अंडकोष में दरà¥à¤¦ होता है। टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में कई लेयर होते हैं, इसलिठइसमें जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती है। लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¥€ बà¥à¤²à¤¡ के कारण इसमें इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो जाता है। इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के कारण टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•लà¥à¤¸ में जलन होती है। यह बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² या संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होता है। इससे जलन दोनों अंडकोष में हो सकता है। यह समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° 45 या उससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उमà¥à¤° के लोगों में देखी जाती है। यदि आपको à¤à¥€ इस पà¥à¤°à¤•ार के लकà¥à¤·à¤£ दिखे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लेनी चाहिà¤à¥¤
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लेना है काफी जरूरी
शरीर में अंडकोष काफी संवेदनशील बॉडी पारà¥à¤Ÿ होता है। अगर इसमें किसी तरह का दरà¥à¤¦, बीमारी या समसà¥à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई दे रहे हैं तो हमें बिना देर किठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलना चाहिà¤à¥¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लेने के बाद ही कà¥à¤› करना चाहिà¤à¥¤ इसके अलावा यदि आप सà¥à¤ªà¥‹à¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ मैन हैं और आपको टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•लà¥à¤¸ में दरà¥à¤¦ हो रहा है तो à¤à¤¸à¥‡ में आपको डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लेनी चाहिà¤à¥¤ बीमारी को नजरअंदाज किया जाठतो यह जानलेवा साबित हो सकती है।
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